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Muhoortha Sangraha (2 Volume Set) [English] 9788170822264 The problem isn’t your love

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Description

The problem isn’t your love it’s your love language

किन्तु भोजन केवल वेदपाठी सदाचारी ब्राह्मणों को ही कराये I मनु - स्मृति में यग्यो पर विशेष ध्यान दिया गया है ई मनु ने सात्विक यग्यो को ही मान्यता दी है

जिनमें कालजनित परिवर्तन तथा परिवर्द्धन नहीं है। तथापि यहाँ पुराणों का काल निर्धारण करना मेरा उद्देश्य नहीं है। भविष्य के अनुत्सन्धित्सु जिज्ञासु वर्ग के लिये यह एक दिशा संकेत मात्र है कि पुराणों के काल के निर्धारण में पाश्चात्य चश्मे तथा उनके मानदण्ड की जगह स्वदेशी एवं स्वतन्त्र दृष्टिकोण को अपनाया जाये। भारत के श्रद्धालु वर्ग के अनुसार ये पुराण सनातन काल से चले आ रहे हैं। उनका मूलतत्त्व एक हजार वर्ष ही पुराना नहीं है। वह तो शाश्वत अतिप्राचीन है। तदनुसार मानव वानर का विकसित रूप नहीं है। वह सृष्टि के प्रारम्भ से ही रहा है। जो लोग स्वयं को वानरों का विकसित रूप डार्विन के विकासवाद के अनुसार मानते हैं

सबसे निकट का लोक यक्ष और यक्षिणियों का है। पृथ्वी के निकट होने के कारण मन्त्र तरंगे इस लोक में शीघ्र पहुँचती हैं । साधक यदि विधि-विधान से साधना करे तो मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है । यक्षिणी साधना सात्विक और सुरक्षित है। सिद्ध होने पर यक्षिणी साधक को मार्गदर्शन प्रदान करती है ।

दीपा माहेश्वरी

Muhoortha Sangraha (2 Volume Set) [English] 9788170822264 The problem isn’t your loveMuhoortha Sangraha (2 Volume Set) [English] By VS Kalyanraman Publisher: CBH Publication

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