जिसका ज्ञान किसी अन्य ज्योतिष ग्रन्थ में अप्राप्य है l भावफल और दशाफल विस्तृत रूप से दिया गया है l यह भी बताया गया है कि एक भावाधिपति का द्वादश भावो में स्थित होने से क्या फल होता है l इस प्रकार १४४ (१२ x १२ ) योगो के फलो का पूर्ण विवरण दिया गया है l दशाफल के विचार को इतना अधिक महत्व दिया गया है कि लगभग आधी पुस्तक इसी सम्बन्ध में है l इतनी सूक्ष्मता और विस्तृत रूप से इस विषय पर किसी अन्य ज्योतिष ग्रन्थ में विचार नहीं किया गया है l इस पुस्तक में ग्रहो के नवांशो
उसके श्लोक ज्योतिनिर्बंध
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'तंत्र ' एक विशाल और व्यापक शब्द है और उसी प्रकार उसका अर्थ भी है असीम व्यापक और विशाल I सम्पूर्ण विश्व में जितने भी धर्म है
complete Guide to Self Learning Course in Astrology
Vastu Niyamanusar Interior Designing [Hindi] Rigved (Volume 1) [Hindi] जिसका ज्ञान किसी अन्य ज्योतिष, , , , , " " , , , , , , ? ? ?